सदा शरण सुख पाऊ
सदा शरण सुख पाऊ गुरूजी हाऊ बहुरी न जल आऊँ गुरूजी हाऊ निंद्राआहार तज्यो म्हारा सामरथ,मुरती म सुरती मिलाऊ रेन दिवस सौ इक्कीस हजार , निरफल एक नी कोऊँ काम क्रोध मोह लोभ पुराणा, इ...
निमाड़ के महान संत श्री सिंगाजी महाराज के निर्गुण भजन जो कि सांसारिक जीव को सरल तरीके से परब्रम्ह परमात्मा से मिलने की राह बताते हे जो कि हमारे बुजुर्ग पीढ़ियों से संजोए हुए हे वो अब नए दौर में विलुप्त होते जा रहे हे इसलिए उन्हें संजोए रखने के लिए ओर ज्ञान का प्रकाश सभी तक पहुंचने के लिए ये ब्लॉग बनाया गया हे ।इसमें से अधिकांश भजन मेरे पूज्य पिताश्री जगदीश जी दुबले गाते थे ।आप सभी का समर्थन अपेक्षित हे । जय सिंगाजी महाराज